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श्लोक 12.340.86  |
ततस्तिष्येऽथ सम्प्राप्ते युगे कलिपुरस्कृते।
एकपादस्थितो धर्मो यत्र तत्र भविष्यति॥ ८६॥ |
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| अनुवाद |
| उसके बाद पुष्य नक्षत्र में कलियुग का आरम्भ होगा, उस समय धर्म का एक अंश ही यहाँ-वहाँ शेष रह जाएगा ॥86॥ |
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| 'After that, Kaliyuga will begin in Pushya Nakshatra. At that time only a phase of religion will be left here and there. 86॥ |
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