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श्लोक 12.340.84  |
प्रोक्षिता यत्र पशवो वधं प्राप्स्यन्ति वै मखे।
यत्र पादश्चतुर्थो वै धर्मस्य न भविष्यति॥ ८४॥ |
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| अनुवाद |
| उस युग में मन्त्रों से पवित्र किये हुए पशु यज्ञों में मारे जायेंगे और धर्म का एक-चौथाई भाग नष्ट हो जायेगा॥ 84॥ |
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| ‘In that age the animals sanctified by mantras will be slaughtered in sacrifices, and one-fourth of the Dharma will be reduced.॥ 84॥ |
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