श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  12.340.84 
प्रोक्षिता यत्र पशवो वधं प्राप्स्यन्ति वै मखे।
यत्र पादश्चतुर्थो वै धर्मस्य न भविष्यति॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
उस युग में मन्त्रों से पवित्र किये हुए पशु यज्ञों में मारे जायेंगे और धर्म का एक-चौथाई भाग नष्ट हो जायेगा॥ 84॥
 
‘In that age the animals sanctified by mantras will be slaughtered in sacrifices, and one-fourth of the Dharma will be reduced.॥ 84॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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