श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  12.340.83 
चतुष्पात् सकलो धर्मो भविष्यत्यत्र वै सुरा:।
ततस्त्रेतायुगं नाम त्रयी यत्र भविष्यति॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
देवो! इस सत्ययुग में चारों चरणों से युक्त सम्पूर्ण धर्म का पालन होगा। तत्पश्चात् त्रेतायुग आएगा, जिसमें वेदत्रयिका का प्रचार होगा। 83॥
 
'Gods! In this Satyayuga, the entire religion consisting of all four stages will be followed. Thereafter Tretayuga will come, in which Vedatrayika will be propagated. 83॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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