श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  12.340.82 
इदं कृतयुगं नाम काल: श्रेष्ठ: प्रवर्तित:।
अहिंस्या यज्ञपशवो युगेऽस्मिन् न तदन्यथा॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
यह सतयुग नामक उत्तम समय है । इस युग में बलि के पशुओं का वध नहीं किया जाता । यहाँ अहिंसा धर्म के विरुद्ध कोई भी कार्य नहीं होता ॥ 82॥
 
‘This is the best time called Satya Yuga. In this Yuga, sacrificial animals are not killed. Nothing happens here that is contrary to the Dharma of non-violence.॥ 82॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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