श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  12.340.80 
गच्छध्वं स्वानधीकारांश्चिन्तयध्वं यथाविधि।
प्रवर्तन्तां क्रिया: सर्वा: सर्वलोकेषु मा चिरम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग जाकर विधिपूर्वक अपना अधिकार पूरा करो। समस्त लोकों में वैदिक अनुष्ठान शीघ्र ही लागू हो जाएँ॥ 80॥
 
‘All of you go and fulfil your rights lawfully. All Vedic rituals should be immediately implemented in all the worlds.॥ 80॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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