श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 72-73
 
 
श्लोक  12.340.72-73 
सन: सनत्सुजातश्च सनक: ससनन्दन:।
सनत्कुमार: कपिल: सप्तमश्च सनातन:॥ ७२॥
सप्तैते मानसा: प्रोक्ता ऋषयो ब्रह्मण: सुता:।
स्वयमागतविज्ञाना निवृत्तिं धर्ममास्थिता:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
‘सन, सनत्सुजात, सनक, सनन्दन, सनत्कुमार, कपिल और सातवें सनातन - ये सात ऋषि भी ब्रह्मा के मानस पुत्र कहे गए हैं। ये स्वयं ज्ञानवान हैं और निवृत्तिधर्म में स्थित हैं। 72-73॥
 
‘San, Sanatsujat, Sanak, Sanandan, Sanatkumar, Kapil and the seventh Sanatan – these seven sages are also said to be the mental sons of Brahma. They themselves have knowledge and are situated in Nivruttidharma. 72-73॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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