श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.340.70 
एते वेदविदो मुख्या वेदाचार्याश्च कल्पिता:।
प्रवृत्तिधर्मिणश्चैव प्राजापत्ये च कल्पिता:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
ये वेदों के प्रमुख विद्वान और प्रवृत्ति-धर्म के अनुयायी हैं। ये सभी वेदाचार्य माने गए हैं और इन्हें प्रजापति का पद प्रदान किया गया है।
 
‘These are the chief scholars of Vedas and followers of the Pravriti-dharma. All of them are considered Vedacharyas and have been conferred the position of Prajapati.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas