| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना » श्लोक 69 |
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| | | | श्लोक 12.340.69  | मरीचिरङ्गिराश्चात्रि: पुलस्त्य: पुलह: क्रतु:।
वसिष्ठ इति सप्तैते मानसा निर्मिता हि ते॥ ६९॥ | | | | | | अनुवाद | | मरीचि, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वशिष्ठ - इन सात ऋषियों की रचना भगवान ब्रह्मा ने अपने मन से की थी। 69॥ | | | | 'Marichi, Angira, Atri, Pulastya, Pulah, Kratu and Vasishtha - these seven sages were created from the mind by Lord Brahma. 69॥ | | ✨ ai-generated | | |
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