श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  12.340.61-62h 
यज्ञैर्ये चापि यक्ष्यन्ति सर्वलोकेषु वै सुरा:॥ ६१॥
कल्पयिष्यन्ति वो भागांस्ते नरा वेदकल्पितान्।
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! समस्त लोकों में जो लोग यज्ञ करेंगे, वे वेदों के निर्देशानुसार यज्ञ में तुम्हारा भाग निश्चित करेंगे।
 
'O Gods! The people in all the worlds who will perform sacrifices will determine your share in the sacrifices as per the instructions of the Vedas. 61 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)