श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.340.6 
श्रुत्वा माहात्म्यमेतस्य देहिनां परमात्मन:।
जनमेजयो महाप्राज्ञो वैशम्पायनमब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान जनमेजय ने समस्त प्राणियों के आत्मारूपी उन परमात्मा नारायणदेव का माहात्म्य सुनकर उनसे इस प्रकार कहा॥6॥
 
The most intelligent Janmejay, after hearing the greatness of this Supreme Soul Narayandev, who is the soul of all living beings, said to them thus. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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