श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.340.59 
येन य: कल्पितो भाग: स तथा मामुपागत:।
प्रीतोऽहं प्रदिशाम्यद्य फलमावृत्तिलक्षणम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! हमारे लिए जो नियति निश्चित की गई थी, वह मुझे उसी रूप में प्राप्त हुई है। इससे प्रसन्न होकर मैं आज तुम्हें पुनरुक्ति रूपी फल देता हूँ ॥59॥
 
‘O Gods! Whatever destiny was decided for us, I have received it in that form. Being pleased with this, today I give you the fruit in the form of repetition. ॥ 59॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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