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श्लोक 12.340.52  |
एष ब्रह्मा लोकगुरुर्महान् लोकपितामह:।
यूयं च विबुधश्रेष्ठा मां यजध्वं समाहिता:॥ ५२॥ |
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| अनुवाद |
| सम्पूर्ण जगत् के ये महान गुरु, लोकपितामह ब्रह्मा और आप सभी महान देवता एकाग्रचित्त होकर यज्ञों के द्वारा मेरी पूजा करें ॥52॥ |
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| May this great Guru of the entire world, Lokpitamah Brahma and all you great gods be concentrated and worship me through yagyas. 52॥ |
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