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श्लोक 12.340.49  |
श्रीभगवानुवाच
भो भो: सब्रह्मका देवा ऋषयश्च तपोधना:।
स्वागतेनार्च्य व: सर्वान् श्रावये वाक्यमुत्तमम्॥ ४९॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान् बोले - 'हे ब्रह्माजी तथा अन्य देवतागण और महान तपस्वी ऋषियों! मैं आप सबका स्वागत करता हूँ और फिर आपसे ये शुभ वचन कहता हूँ।' ॥49॥ |
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| The Lord said, 'Oh Brahma and other deities and sages who are endowed with great penance! I welcome you all and then tell you these auspicious words.' ॥ 49॥ |
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