श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.340.49 
श्रीभगवानुवाच
भो भो: सब्रह्मका देवा ऋषयश्च तपोधना:।
स्वागतेनार्च्य व: सर्वान् श्रावये वाक्यमुत्तमम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
भगवान् बोले - 'हे ब्रह्माजी तथा अन्य देवतागण और महान तपस्वी ऋषियों! मैं आप सबका स्वागत करता हूँ और फिर आपसे ये शुभ वचन कहता हूँ।' ॥49॥
 
The Lord said, 'Oh Brahma and other deities and sages who are endowed with great penance! I welcome you all and then tell you these auspicious words.' ॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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