श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.340.45 
ततस्ते ब्रह्मणा सार्धमृषयो विबुधास्तथा।
क्षीरोदस्योत्तरं कूलं जग्मुर्लोकहितार्थिन:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सभी ऋषिगण और देवतागण सम्पूर्ण जगत् के कल्याण की भावना से ब्रह्माजी के साथ क्षीरसागर के उत्तर तट पर गए ॥45॥
 
Thereafter, all those sages and gods went with Brahmaji to the north bank of Kshirsagar with the feeling of welfare of the entire world. 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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