श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.340.44 
इत: सर्वेऽपि गच्छाम: शरणं लोकसाक्षिणम्।
महापुरुषमव्यक्तं स नो वक्ष्यति यद्धितम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
आओ, हम सब यहाँ से उन महापुरुष नारायणदेव की शरण में चलें जो अदृश्य जगत के साक्षी हैं। वे हमें हमारे लिए हितकर बातें बताएँगे। ॥44॥
 
Let us all go from here to seek refuge in the great man Narayandev who is the witness of the invisible world. He will tell us things that are beneficial for us. ॥ 44॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas