श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.340.42 
ब्रह्मोवाच
साध्वहं ज्ञापितो देवा युष्माभिर्भद्रमस्तु व:।
ममाप्येषा समुत्पन्ना चिन्ता या भवतां मता॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले- हे देवताओं! आपने मुझे अच्छी बात सुझाई है! आपका कल्याण हो। जो चिंता आपके हृदय में उत्पन्न हुई है, वही मेरे हृदय में भी उत्पन्न हुई है।
 
Brahmaji said- O Gods! You have suggested a good thing to me! May you be blessed. The worry that has arisen in your heart has arisen in my heart as well.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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