श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.340.4 
एतं न: संशयं सौते छिन्धि गुह्यं सनातनम्।
त्वया नारायणकथा: श्रुता वै धर्मसंहिता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुतानन्दन! मेरे मन में यह गहन संदेह सदैव उठता रहता है, कृपया इसका समाधान करें; क्योंकि आपने भगवान नारायण के विषय में अनेक धार्मिक कथाएँ सुनी हैं॥4॥
 
Sutanandana! This deep doubt always arises in my mind, please resolve it; because you have heard many religious stories about Lord Narayana. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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