|
| |
| |
श्लोक 12.340.32  |
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिश्च पञ्चमम्।
अहंकार प्रसूतानि महाभूतानि पञ्चधा॥ ३२॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| ‘पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नि – ये पाँच सूक्ष्म तत्त्व अहंकार से उत्पन्न हुए हैं।॥ 32॥ |
| |
| ‘Earth, air, sky, water and fire – these five subtle elements have originated from the ego.॥ 32॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|