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mahabharat 12.340.26-27: जब मैंने अपनी इन्द्रियों को वश में करके तप पूर्ण कर लिया, तब भगवान नारायण की कृपा से क्षीरसागर के तट पर मुझे अपनी इच्छानुसार तीनों कालों का ज्ञान प्राप्त हुआ। अतः तुम्हारे संशय का निवारण करने के लिए मैं तुम्हें एक अच्छी और न्यायपूर्ण बात सुनाता हूँ। तुम सब लोग ध्यानपूर्वक सुनो॥ 26-27॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  12.340.26-27 
तस्य मे तप्ततपसो निगृहीतेन्द्रियस्य च।
नारायणप्रसादेन क्षीरोदस्यानुकूलत:॥ २६॥
त्रैकालिकमिदं ज्ञानं प्रादुर्भूतं यथेप्सितम्।
तच्छृणुध्वं यथान्यायं वक्ष्ये संशयमुत्तमम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब मैंने अपनी इन्द्रियों को वश में करके तप पूर्ण कर लिया, तब भगवान नारायण की कृपा से क्षीरसागर के तट पर मुझे अपनी इच्छानुसार तीनों कालों का ज्ञान प्राप्त हुआ। अतः तुम्हारे संशय का निवारण करने के लिए मैं तुम्हें एक अच्छी और न्यायपूर्ण बात सुनाता हूँ। तुम सब लोग ध्यानपूर्वक सुनो॥ 26-27॥
 
'When I had completed my penance by controlling my senses, then by the grace of Lord Narayana, I got the knowledge of the three time periods as per my desire on the banks of the Kshirsagar. Therefore, to remove your doubts, I will tell you something good and just. All of you listen carefully.॥ 26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)