श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.340.2 
निवृत्तं चास्थितो धर्मं क्षमी भागवत: प्रभु:।
निवृत्तिधर्मान् विदधे स एव भगवान् प्रभु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
सर्वक्षमाशील भगवान नारायण जो सबके स्वामी हैं, वे स्वयं निवृत्तिधर्म में स्थित हैं और उन्हीं सर्वशक्तिमान भगवान ने निवृत्तिधर्म का विधान किया है॥2॥
 
Lord Narayana, the all-forgiving Lord, who is the master of all, himself is situated in Nivruttidharma and the same Almighty God has prescribed Nivruttidharma. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)