श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.340.15 
कथं भागहरा: प्रोक्ता देवता: क्रतुषु द्विज।
किमर्थं चाध्वरे ब्रह्मन्निज्यन्ते त्रिदिवौकस:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! यज्ञ में भाग लेने का अधिकार देवताओं को क्यों बताया गया है? हे ब्रह्मन्! यज्ञ में केवल स्वर्ग में निवास करने वाले देवताओं की ही पूजा क्यों की जाती है? 15॥
 
Dwijshreshtha! Why are the gods said to have the right to participate in yagyas? Brahman! Why are only the gods who reside in heaven worshiped in Yagya? 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)