श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  12.340.118 
क्षेमेण गच्छेदध्वानमिदं य: पठते पथि।
यो यं कामं कामयते स तमाप्नोति च ध्रुवम्॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मार्ग में इसका पाठ करता है, उसकी यात्रा सफल होती है। जो मनुष्य इसे पढ़ता और सुनता है, उसे अवश्य ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है ॥118॥
 
He who recites it on the way completes his journey successfully. The person who reads and listens to it surely obtains whatever he desires. ॥ 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)