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mahabharat 12.340.117: जिस स्त्री का गर्भ रुका हुआ हो, उसे इसके श्रवण से उस कष्ट से मुक्ति मिलती है । गर्भवती स्त्री समय पर पुत्र को जन्म देती है । बांझ स्त्री भी संतान उत्पन्न करती है और उसके गर्भ से पुत्र, पौत्र और समृद्धि की प्राप्ति होती है ॥117॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  12.340.117 
लग्नगर्भा विमुच्येत गर्भिणी जनयेत् सुतम्।
वन्ध्या प्रसवमाप्नोति पुत्रपौत्रसमृद्धिमत्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
जिस स्त्री का गर्भ रुका हुआ हो, उसे इसके श्रवण से उस कष्ट से मुक्ति मिलती है । गर्भवती स्त्री समय पर पुत्र को जन्म देती है । बांझ स्त्री भी संतान उत्पन्न करती है और उसके गर्भ से पुत्र, पौत्र और समृद्धि की प्राप्ति होती है ॥117॥
 
A woman whose pregnancy is stuck, gets relief from that problem by listening to this. A pregnant woman gives birth to a son in due time. A barren woman also gives birth and her delivery is blessed with sons, grandsons and prosperity. ॥ 117॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)