श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  12.340.111 
स चास्माकमुपाध्याय: सहास्माभिर्विशाम्पते।
चतुर्वेदोद्‍गताभिस्तमृग्भि: समभितुष्टुवे॥ १११॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! तब हमारे उपाध्याय व्यास ने हमारे साथ चारों वेदों की ऋचाओं द्वारा भगवान नारायण की स्तुति की। 111.
 
Prajanath! Then our Upadhyay Vyasa praised Lord Narayana with us through the verses of the four Vedas. 111.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas