श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  12.340.108 
एष चैतत् परं ब्रह्म ज्ञेयो विज्ञानचक्षुषा।
एवमेतत् पुरा दृष्टं मया वै ज्ञानचक्षुषा॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
वे परम ब्रह्म हैं। उन्हें केवल ज्ञान-चक्षु से ही देखा और जाना जा सकता है। पूर्वकाल में मैंने उन्हें ज्ञान-चक्षु से इसी प्रकार देखा था ॥108॥
 
He is the Supreme Brahman. He can be seen and known only with the eye of knowledge. In the past, I had seen Him in this manner with the eye of knowledge. ॥108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)