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श्लोक 12.340.101  |
तस्मै नमध्वं देवाय निर्गुणाय महात्मने।
अजाय विश्वरूपाय धाम्ने सर्वदिवौकसाम्॥ १०१॥ |
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| अनुवाद |
| शिष्यों! तुम उसी अजन्मा, सर्वव्यापक रूप, सम्पूर्ण देवताओं के आश्रय, निराकार परमात्मा नारायणदेव को नमस्कार करते हो ॥101॥ |
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| Disciples! You salute the same unborn, universal form, the shelter of all the gods, the formless Supreme Soul Narayandev. 101॥ |
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