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mahabharat 12.34.28: मनुष्य को चाहिए कि वह पशुओं को न तो अनावश्यक मारे और न मरवाए। पशुओं के लिए विधिपूर्वक किया गया कर्मकाण्ड उन पर उपकार है॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.34.28 
वृथा पशुसमालम्भं नैव कुर्यान्न कारयेत्।
अनुग्रह: पशूनां हि संस्कारो विधिनोदित:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि वह पशुओं को न तो अनावश्यक मारे और न मरवाए। पशुओं के लिए विधिपूर्वक किया गया कर्मकाण्ड उन पर उपकार है॥28॥
 
A man should neither kill animals unnecessarily nor get them killed. The rituals performed for animals in a proper manner is a favour to them.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)