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mahabharat 12.34.16: अब उन कारणों का वर्णन सुनो जिनके कारण मनुष्य इन कर्मों को करते हुए भी पाप में लिप्त नहीं होता ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.34.16 
एतान्येव तु कर्माणि क्रियमाणानि मानवा:।
येषु येषु निमित्तेषु न लिप्यन्तेऽथ तान् शृणु॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अब उन कारणों का वर्णन सुनो जिनके कारण मनुष्य इन कर्मों को करते हुए भी पाप में लिप्त नहीं होता ॥16॥
 
Now listen to the description of the reasons due to which a man does not become involved in sin even after performing these actions. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)