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mahabharat 12.339.d6: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! उस समय सब लोग मेरी स्तुति करेंगे और मैं जटाधारी ब्रह्मचारी का वेश धारण करके बलि की यज्ञवेदी पर जाऊँगा और उसके यज्ञ की खूब प्रशंसा करूँगा, जिसे सुनकर बलि बहुत प्रसन्न होगा।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  12.339.d6 
(जटी गत्वा यज्ञसद: स्तूयमानो द्विजोत्तम।
यज्ञस्तवं करिष्यामि श्रुत्वा प्रीतो भवेद् बलि:
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! उस समय सब लोग मेरी स्तुति करेंगे और मैं जटाधारी ब्रह्मचारी का वेश धारण करके बलि की यज्ञवेदी पर जाऊँगा और उसके यज्ञ की खूब प्रशंसा करूँगा, जिसे सुनकर बलि बहुत प्रसन्न होगा।
 
O best of Brahmins! At that time everyone will praise me and I will go to Bali's sacrificial altar in the guise of a brahmacari with matted hair and will praise his sacrifice profusely, hearing which Bali will be very pleased.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)