श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  12.339.d2 
श्रीभगवानुवाच
शृणु नारद तत्त्वेन प्रादुर्भावान् महामुने।
मत्स्य: कूर्मो वराहश्च नरसिंहश्च वामन:
रामो रामश्च रामश्च कृष्ण: कल्की च ते दश।
 
 
अनुवाद
भगवान श्री ने कहा- महामुनि नारद! तुम मेरे अवतारों के नाम सुनो- मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, श्रीराम, बलराम, श्रीकृष्ण और कल्कि- ये दस अवतार हैं।
 
Lord Shri said – Mahamuni Narad! You listen to the names of my incarnations - Matsya, Kurma, Varaha, Narasimha, Vaman, Parashuram, Shriram, Balram, Shri Krishna and Kalki - these are the ten incarnations.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)