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mahabharat 12.339.d14h-123: इस प्रकार परम्परा से यह महान् ज्ञान महाराज शान्तनु को प्राप्त हुआ। पिताश्री, तत्पश्चात् मेरे पिता शान्तनु ने मुझे इसका उपदेश दिया। 123.   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक d14h-123
 
 
श्लोक  12.339.d14h-123 
(एवं परम्पराख्यातमिदं शान्तनुमाश्रितम्।)
मम चापि पिता तात कथयामास शान्तनु:॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार परम्परा से यह महान् ज्ञान महाराज शान्तनु को प्राप्त हुआ। पिताश्री, तत्पश्चात् मेरे पिता शान्तनु ने मुझे इसका उपदेश दिया। 123.
 
Thus, by tradition, this great knowledge was received by Maharaja Shantanu. Father, then my father Shantanu taught it to me. 123.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)