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mahabharat 12.339.d13: मैं गिरगिट की योनि में फंसे राजा नृग का भी उद्धार करूँगा। उसी अवतार में, अपने पौत्र अनिरुद्ध के लिए, मैं बाणासुर की राजधानी शोणितपुर जाऊँगा और वहाँ राक्षस सेना पर कहर बरपाऊँगा।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  12.339.d13 
(कृकलासं नृगं चैव मोचयिष्ये ह वै पुन:
तत्र पौत्रनिमित्तेन गत्वा वै शोणितं पुरम्।
बाणस्य च पुरं गत्वा करिष्ये कदनं महत्॥ )
 
 
अनुवाद
मैं गिरगिट की योनि में फंसे राजा नृग का भी उद्धार करूँगा। उसी अवतार में, अपने पौत्र अनिरुद्ध के लिए, मैं बाणासुर की राजधानी शोणितपुर जाऊँगा और वहाँ राक्षस सेना पर कहर बरपाऊँगा।
 
I will also rescue King Nriga who is trapped in the womb of a chameleon. In the same incarnation, for the sake of my grandson Aniruddha, I will go to Banasura's capital Shonitpur and wreak havoc on the demon army there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)