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mahabharat 12.339.d1: भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! तत्पश्चात नारदजी ने भगवान जनार्दन से पूछा - 'महान्! आपको किन-किन रूपों में देखा (या स्मरण किया) जाना चाहिए?'   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.339.d1 
(भीष्म उवाच
नारदस्त्वथ पप्रच्छ भगवन्तं जनार्दनम्।
केषु केषु च भावेषु त्वं द्रष्टव्यो महाप्रभो
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! तत्पश्चात नारदजी ने भगवान जनार्दन से पूछा - 'महान्! आपको किन-किन रूपों में देखा (या स्मरण किया) जाना चाहिए?'
 
Bhishmaji says – Yudhishthir! Thereafter, Naradji asked Lord Janardan - 'Great Lord! In which forms should you be seen (and remembered)?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)