श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 95-96h
 
 
श्लोक  12.339.95-96h 
य: कालयवन: ख्यातो गर्गतेजोऽभिसंवृत:॥ ९५॥
भविष्यति वधस्तस्य मत्त एव द्विजोत्तम।
 
 
अनुवाद
हे द्विजश्रेष्ठ! गर्गाचार्य के तेज से उत्पन्न होकर जो कालयवन नामक प्रसिद्ध दैत्य शक्तिशाली हो गया है, उसका वध भी मेरे द्वारा ही संभव होगा।
 
O best of the two! The famous demon named Kalayavan who has become powerful by being born from the brilliance of Gargacharya, his killing will also be possible only by me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)