श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 90-91h
 
 
श्लोक  12.339.90-91h 
तत्राहं दानवान् हत्वा सुबहून् देवकण्टकान्॥ ९०॥
कुशस्थलीं करिष्यामि निवेशं द्वारकां पुरीम्।
 
 
अनुवाद
वहाँ मैं अनेक देवकण्टक राक्षसों का वध करूँगा और कुशस्थली को द्वारकापुरी के रूप में स्थापित करके वहाँ निवास करूँगा॥90 1/2॥
 
There I shall kill many Devkantaka demons and establish Kushasthali as Dwarakapuri and shall reside there.॥90 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)