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mahabharat 12.339.85: तत्पश्चात् जब त्रेता और द्वापर की संध्या होगी, तब मैं जगत के स्वामी दशरथ के पुत्र राम के रूप में अवतार लूँगा।   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  12.339.85 
संध्यांशे समनुप्राप्ते त्रेताया द्वापरस्य च।
अहं दाशरथी रामो भविष्यामि जगत‍्पति:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब त्रेता और द्वापर की संध्या होगी, तब मैं जगत के स्वामी दशरथ के पुत्र राम के रूप में अवतार लूँगा।
 
Thereafter, when the evening of the Treta and Dwapara seasons arrive, I shall incarnate as Rama, the son of Dasharatha, the Lord of the Universe. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)