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mahabharat 12.339.84: फिर त्रेतायुग में मैं भृगुकुलभूषण परशुराम के रूप में प्रकट होऊँगा और सेना और सवारों से परिपूर्ण क्षत्रिय कुल का नाश करूँगा॥84॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  12.339.84 
त्रेतायुगे भविष्यामि रामो भृगुकुलोद्वह:।
क्षत्रं चोत्सादयिष्यामि समृद्धबलवाहनम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
फिर त्रेतायुग में मैं भृगुकुलभूषण परशुराम के रूप में प्रकट होऊँगा और सेना और सवारों से परिपूर्ण क्षत्रिय कुल का नाश करूँगा॥84॥
 
Then in Tretayuga, I will appear in the form of Bhrigukulbhushan Parashuram and will destroy the Kshatriya clan, which is full of army and riders. 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)