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mahabharat 12.339.76: जिस प्रकार अनन्त प्रकाशमान काल सूर्य को अदृश्य हो जाने पर बलपूर्वक दृष्टि में लाता है, उसी प्रकार मैं भी समस्त प्राणियों के लाभ के लिए इस पृथ्वी को समुद्र के जल से बलपूर्वक ऊपर लाता हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  12.339.76 
नष्टे पुनर्बलात् काल आनयत्यमितद्युति:।
तथा बलादहं पृथ्वीं सर्वभूतहिताय वै॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार अनन्त प्रकाशमान काल सूर्य को अदृश्य हो जाने पर बलपूर्वक दृष्टि में लाता है, उसी प्रकार मैं भी समस्त प्राणियों के लाभ के लिए इस पृथ्वी को समुद्र के जल से बलपूर्वक ऊपर लाता हूँ।'
 
'Just as the infinitely radiant time forcibly brings the sun back into sight after it becomes invisible, so too I forcibly bring this earth up from the waters of the ocean for the benefit of all creatures.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)