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mahabharat 12.339.73: उस शेष का नाम संकर्षण है। संकर्षण ने प्रद्युम्न को प्रकट किया है और प्रद्युम्न से अनिरुद्ध उत्पन्न हुए हैं। वह सब मैं ही हूँ। यह बारम्बार उत्पन्न होने वाला ब्रह्माण्ड मेरा ही है॥ 73॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  12.339.73 
स हि संकर्षण: प्रोक्त: प्रद्युम्नं सोऽप्यजीजनत्।
प्रद्युम्नादनिरुद्धोऽहं सर्गो मम पुन: पुन:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
उस शेष का नाम संकर्षण है। संकर्षण ने प्रद्युम्न को प्रकट किया है और प्रद्युम्न से अनिरुद्ध उत्पन्न हुए हैं। वह सब मैं ही हूँ। यह बारम्बार उत्पन्न होने वाला ब्रह्माण्ड मेरा ही है॥ 73॥
 
‘That Shesh is called Sankarshana. Sankarshana has manifested Pradyumna and Aniruddha has emerged from Pradyumna. I am all that. This repeatedly arising expanse of the universe is mine.॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)