श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  12.339.7-8 
ओङ्कारमुद्‍‍‍गिरन् वक्त्रात् सावित्रीं चतदन्वयाम्॥ ७॥
शेषेभ्यश्चैव वक्त्रेभ्यश्चतुर्वेदान् गिरन् बहून्।
आरण्यकं जगौ देवो हरिर्नारायणो वशी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सबको नियंत्रित करने वाले भगवान नारायण हरि एक मुख से ओंकार और उससे संबंधित गायत्री का जप करते थे और दूसरे मुख से चारों वेदों और उनके आरण्यकभाग का गान कर रहे थे ॥7-8॥
 
Lord Narayan Hari, who controls everyone, used to chant Omkar and its related Gayatri with one mouth and was singing the four Vedas and their Aranyakabhaga with the other mouth. 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)