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mahabharat 12.339.63-64: ब्रह्मन्! आप वर चाहने वाले साधकों को वर देने में समर्थ होंगे। हे कठोर व्रतों का पालन करने वाले महाभाग तपोधन! आप देवताओं, दानवों, ऋषियों, पितरों तथा नाना प्रकार के प्राणियों द्वारा सदैव पूज्य रहेंगे। 63-64॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 63-64
 
 
श्लोक  12.339.63-64 
त्वं चैव वरदो ब्रह्मन् वरेप्सूनां भविष्यसि।
सुरासुरगणानां च ऋषीणां च तपोधन॥ ६३॥
पितॄणां च महाभाग सततं संशितव्रत।
विविधानां च भूतानां त्वमुपास्यो भविष्यसि॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! आप वर चाहने वाले साधकों को वर देने में समर्थ होंगे। हे कठोर व्रतों का पालन करने वाले महाभाग तपोधन! आप देवताओं, दानवों, ऋषियों, पितरों तथा नाना प्रकार के प्राणियों द्वारा सदैव पूज्य रहेंगे। 63-64॥
 
'Brahman! You will be able to grant boons to those seekers who want boons. Mahabhag Tapodhan, who observes strict fasts! You will always be worshipable by gods, demons, sages, ancestors and various types of creatures. 63-64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)