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mahabharat 12.339.61-62: (वे आशीर्वाद इस प्रकार हैं-) 'ब्रह्मन्! तुम प्रत्येक कल्प के प्रारम्भ में मेरे पुत्र के रूप में जन्म लोगे। तुम्हें जगत के अधिपति का पद प्राप्त होगा। तुम्हारा पर्यायवाची 'अहंकर्ता' होगा। तुम्हारी निर्धारित मर्यादाओं का कोई उल्लंघन नहीं करेगा।' 61-62.   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 61-62
 
 
श्लोक  12.339.61-62 
मत्पुत्रत्वं च कल्पादौ लोकाध्यक्षत्वमेव च॥ ६१॥
अहंकारकृतं चैव नाम पर्यायवाचकम्।
त्वया कृतां च मर्यादां नातिक्रंस्यति कश्चन॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
(वे आशीर्वाद इस प्रकार हैं-) 'ब्रह्मन्! तुम प्रत्येक कल्प के प्रारम्भ में मेरे पुत्र के रूप में जन्म लोगे। तुम्हें जगत के अधिपति का पद प्राप्त होगा। तुम्हारा पर्यायवाची 'अहंकर्ता' होगा। तुम्हारी निर्धारित मर्यादाओं का कोई उल्लंघन नहीं करेगा।' 61-62.
 
(Those blessings are as follows-) 'Brahman! You will be born as my son at the beginning of every Kalpa. You will get the position of the head of the world. Your synonym will be 'Ahankarta' (one who creates ego). No one will violate the limits set by you. 61-62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)