श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  12.339.6-7h 
एतान् बहुविधान् वर्णान् रूपैर्बिभ्रत्सनातन:।
सहस्रनयन: श्रीमान् शतशीर्ष: सहस्रपात्॥ ६॥
सहस्रोदरबाहुश्च अव्यक्त इति च क्वचित्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सनातन भगवान श्रीहरि के स्वरूप में अनेक रंग थे। उनके हजारों नेत्र, सैकड़ों (हजारों) सिर, हजारों पैर, हजारों उदर और हजारों हाथ थे। वे असाधारण तेज से संपन्न थे और कहीं-कहीं उनका स्वरूप अदृश्य था।
 
Thus the eternal God Shri Hari had various colours in his form. He had thousands of eyes, hundreds (thousands) of heads, thousands of feet, thousands of stomachs and thousands of hands. He was blessed with extraordinary radiance and in some places his form was invisible. 6 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)