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mahabharat 12.339.58: मेरे शरीर में स्थित इन तीन मूर्तिरहित गुणों को मूर्ति के समान देखो। मुने! पिता का कार्य भगवान के कार्य से भी महान है। 58॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.339.58 
त्रींश्चैवेमान् गुणान् पश्य मत्स्थान् मूर्तिविवर्जितान्।
देवकार्यादपि मुने पितृकार्यं विशिष्यते॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
मेरे शरीर में स्थित इन तीन मूर्तिरहित गुणों को मूर्ति के समान देखो। मुने! पिता का कार्य भगवान के कार्य से भी महान है। 58॥
 
‘Look at these three idol-free qualities present in my body as idol-like. Mune! Father's work is greater than the work of God. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)