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mahabharat 12.339.52: इसी प्रकार मेरे वामभाग में बारह आदित्य विराजमान हैं। देवताओं में श्रेष्ठ आठ वसु आगे की ओर स्थित हैं। उन सबको स्पष्ट रूप से देखो॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.339.52 
द्वादशैव तथाऽऽदित्यान् वामपार्श्वे समास्थितान्।
अग्रतश्चैव मे पश्य वसूनष्टौ सुरोत्तमान्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार मेरे वामभाग में बारह आदित्य विराजमान हैं। देवताओं में श्रेष्ठ आठ वसु आगे की ओर स्थित हैं। उन सबको स्पष्ट रूप से देखो॥ 52॥
 
‘Similarly, twelve Adityas are seated on my left side. The eight Vasus, the best of the gods, are present in the front. See them all clearly.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)