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mahabharat 12.339.3: कहीं तोते के पंख के समान हरा, कहीं स्फटिक के समान चमकीला, कहीं कज्जलराशि के समान काला और कहीं सोने के समान चमकीला था। 3॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.339.3 
शुकपत्रनिभ: किंचित् किंचित्स्फटिकसंनिभ:।
नीलाञ्जनचयप्रख्यो जातरूपप्रभ: क्वचित्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कहीं तोते के पंख के समान हरा, कहीं स्फटिक के समान चमकीला, कहीं कज्जलराशि के समान काला और कहीं सोने के समान चमकीला था। 3॥
 
Some of it was green like a parrot's feather, some was as bright as a crystal, somewhere it was black like Kajjalrashi and somewhere else it was as bright as gold. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)