श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.339.2 
किंचिच्चन्द्राद् विशुद्धात्मा किंचिच्चन्द्राद्विशेषवान्।
कृशानुवर्ण: किंचिच्च किंचिद्धिष्ण्याकृति: प्रभु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उनका रूप चन्द्रमा से भी कुछ अधिक निर्मल और चन्द्रमा से भी कुछ अधिक विलक्षण था। कुछ अग्नि के समान तेजस्वी थे और कुछ तारों के समान उजले थे॥ 2॥
 
His form was somewhat more pure than the moon and somewhat more unique than the moon. Some were as radiant as fire and some were as bright as the stars.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)