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mahabharat 12.339.16: नारद बोले, 'हे प्रभु! जब मुझे सर्वशक्तिमान के दर्शन हुए, तो मुझे तुरंत ही तपस्या, यम और नियम का फल प्राप्त हो गया।'   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.339.16 
नारद उवाच
अद्य मे तपसो देव यमस्य नियमस्य च।
सद्य: फलमवाप्तं वै दृष्टो यद् भगवान् मया॥ १६॥
 
 
अनुवाद
नारद बोले, 'हे प्रभु! जब मुझे सर्वशक्तिमान के दर्शन हुए, तो मुझे तुरंत ही तपस्या, यम और नियम का फल प्राप्त हो गया।'
 
Narada said, 'O Lord! When I got the darshan of the Almighty, I immediately got the fruits of tapasya, yama and niyama.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)