वृणीष्व च वरं विप्र मत्तस्त्वं यदिहेच्छसि।
प्रसन्नोऽहं तवाद्येह विश्वमूर्तिरिहाव्यय:॥ १५॥
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं अविनाशी परमेश्वर आज तुम पर प्रसन्न हूँ; अतः जो भी वर चाहो, मुझसे माँग लो। ॥15॥
O best of Brahmins! I, the imperishable Supreme Lord of the universe, am pleased with you today; therefore, ask for whatever boon you desire from me. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥