Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.138-139: सारथिपुत्र ने कहा, "शौनक! मैंने तुम्हें वैशम्पायन द्वारा कही गई पूरी कथा कह सुनाई। उसे सुनकर जनमेजय ने उत्तम रीति से भगवान का यज्ञ किया। तुम लोग भी तपस्वी हो और व्रत का पालन करते हो।" | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौतिरुवाच
एतत् ते सर्वमाख्यातं वैशम्पायन कीर्तितम्॥ १३८॥
जनमेजयेन तच्छ्रुत्वा कृतं सम्यग् यथाविधि।
यूयं हि तप्ततपस: सर्वे च चरितव्रता:॥ १३९॥
अनुवाद
सारथिपुत्र ने कहा, "शौनक! मैंने तुम्हें वैशम्पायन द्वारा कही गई पूरी कथा कह सुनाई। उसे सुनकर जनमेजय ने उत्तम रीति से भगवान का यज्ञ किया। तुम लोग भी तपस्वी हो और व्रत का पालन करते हो।"
The son of a charioteer said, "Shaunak! I have told you the entire story told by Vaishampayana. After listening to it, Janamejaya performed the Yajna of the Lord in the best manner. You people are also ascetics and observe fasts. 138-139.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥